ऐसे मैं हम तुम्हे नजर भी आते तो क्या आते।
तुम्हे हम कुछ बताते तो क्या बताते, हम थे तो सामने ही मगर।
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"Dil Ki Baat"
— एक टूटा हुआ मन
हम कई बार
अपने दिल की बात
किसी अपने से कहना चाहते हैं,
मगर चाह कर भी कह नहीं पाते...
क्योंकि हमें पता होता है —
वो हमें समझना ही नहीं चाहता।
वो किसी और को अहमियत देता है,
और हम...
बस एक कोने में बैठे
उसके इंतज़ार में टूटते रहते हैं।
हम भीतर ही भीतर
दर्द में मरते रहते हैं,
पर वो कभी ये जानने की कोशिश नहीं करता
कि हमारी भी कुछ फ़ीलिंग्स हैं।
जब रिश्ता टूटता है...
तो वही इंसान हमें ही दोष देता है —
"ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है।"
वो कभी ये नहीं सोचता
कि उसने क्या खो दिया है।
वो अपनी ज़िंदगी में
फ़ालतू लोगों को जगह देता है,
और जो उसे सच्चा प्यार करते हैं,
उन्हें खो देता है।
जब वक़्त बीत जाता है
तो उसे अहसास होता है,
पर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है...
हम बदल चुके होते हैं।



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