"आधुनिक दौर की अंधी दौड़"
ये किस तरह की जंग है, ये किस तरह की दौड़ है...
ये किस तरह की जंग है,
ये किस तरह की दौड़ है?
हम जा रहे हैं किस तरफ,
हमें पहुँचना कहीं और है।
हम चाहते हैं किसी और को,
घर में कोई और है।
सुनसान हैं शादियाँ,
मुर्दा घरों में शोर है।
ये किस तरह की जंग है,
ये किस तरह की दौड़ है?
जिसे पाना है, वो है पागल उसके लिए,
जिसने पा लिया, वो उसे छोड़ने की होड़ में है।
मुर्दों पर लोग रो रहे,
जिन्दों पर ना गौर है।
ये किस तरह की जंग है,
ये किस तरह की दौड़ है?
ये दौलतों की हवस ने फिर तुझको काफिर कर दिया,
शांत चित्त तेरा छीन कर, क्रोध में तुझे भर दिया।
लक्ष्य तेरा था खुदा,
तेरा हवस पे ज़ोर है।
हम जा रहे हैं किस तरफ,
हमें जाना कहीं और है।
ये किस तरह की जंग है,
ये किस तरह की दौड़ है?
ये ख्वाब, ये इरादे, ये बेचैनी,
ये अनदेखा सा बोझ है।
ये किस तरह की जंग है,
ये किस तरह की दौड़ है?
वस्त्र तेरे श्वेत हैं,
कर्म काले अनेक हैं।
जेब में सिक्के भरे,
कोई तेरा क्या करे?
उम्र तेरी लंबी है,
कर्मफल नज़दीक है।
ये किस तरह की जंग है,
ये किस तरह की दौड़ है?
हाथ में गाण्डीव धार,
स्वयं को कर अमर,
बाँध कर अपनी कमर—
युद्ध कर, युद्ध कर, युद्ध कर!
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