बरसों सीखा बोलना पर .....

 बरसों पहले सीखा बोलना 

पर क्या बोलें ये पता नहीं ।

सब उजड़ा बोली के पीछे 

और बोले मेरी खता नहीं ।


जब मानव तू बच्चा था ,

न बोल था सकता कच्चा था 

सच बोलू तब अच्छा था ।


बस इसी बात का रगड़ा है 

ढीली वाणी का झगड़ा है। 

(इस छोटी सी कविता मैं मैंने ये बताने का प्रयास किया है की जब तक हो सके अपनी वाणी को नियत्रण मैं रखना चाहिए )



Comments